बहुत
दिनों से सोच
रहा था कुछ
लिखूं -कुछ लिखूं जो लोगों
के दिल तक
पहुंचे । आखिर
में थक हार के
बैठ गया क्यूंकि
ऐसी ही सोच
वाले अनगिनत नवयुवक
और भी हैं
और तो और
कुछ के लिए
तो शायद यही
रोज़ी रोटी का
जरिया भी. हांलाकि
मै इस व्यवसाय
का आदमी नही
हूँ ,हाँ ये
बात और है की
ये मेरी चाहत
जरुर रही है। सो मैंने फैसला किया की ऐसा कुछ लिखूं जो औरों के दिल तक
ना सही लेकिन मेरे दिल तक जरुर पहुचे।
मेरे
ही ऊपर मेरा
एक लेख।
शीर्षक:
मैं, मेरा भूत, वर्तमान एवं भविष्य ।
आज
मेरा वर्तमान बहुत
उदास सा दिख रहा
है, मैंने पूछा
इस उदासी का
कारण क्या है?
कहने लगा, मुर्ख
तू तो ऐसे
पूछ रहा है
जैसे तुझे इसका
इल्म ही नहीं,
मै तेरी परिस्थिति
को लेकर बेचैन हूँ,तेरा
भविष्य मुझसे बार बार
यही प्रश्न करता
है की तूने
उसके लिए क्या सोच
रखा है और मै
हमेशा निःशब्द हो
जाता हूँ ।
कटाक्ष करते हुए
उसने मुझसे कहा
तू भी अच्छा
अभिनेता है खुद
को ही
झूठ बोल के
समझा लेता है
।
मैंने
पल भर उसकी
बातों पर गौर
किया और कहा,
मेरे वर्तमान तू
किस दुनिया में
जी रहा है,
मै भली
भांति जानता हूँ
की तू परेशान
है, बेचैन है,लेकिन इस परेशानी
का कारण मै
या कोई और
नहीं उस
भविष्य का तुझपे
हावी होना है
जो खुद तो
चैन से बैठ
कर मजे कर
रहा है लेकिन
अपने बेतुके सवालों से तुझे
परेशान कर रहा
है । माना
तू पुरानी पीढ़ी
का वर्तमान है परन्तु
ऐसा तो नहीं
की तू इस
नई पीढ़ी के
वर्तमान से कुछ
सीख नहीं ले
सकता। ये नयी पीढ़ी का वर्तमान जो अपने आप से खुश है ,अपने आस पास की सभी
चीज़ों से खुश है,ये जो बेशर्म है और जानता
है शर्म केवल लेना जानती है,कभी किसी को कुछ नहीं देती, ये जिसकी हर रग में साहस है,
ये जो अपने भूत पे खड़ा होकर हुंकार भरता है और जो भविष्य की कही एक ना सुनता। तू तो उस भविष्य के सवालों से परेशान है जो अपने
वज़ूद के लिए भी तुझ पर और कहीं ना कहीं मुझ पर निर्भर है। मै तुझसे पूछता हूँ की क्या
उसे कुछ पूछने का हक भी है?
इतने
में मेरा भूत
आ गया, जो
दिखने में कुछ
ज्यादा ही खूबसूरत
था ,हांलाकि जब
वो वर्तमान का हिस्सा
हुआ करता था,
मैंने उसे इस
क़दर नजरंदाज किया
की आज भी
पछतावा होता है
मुझे इस बात
पर।
वर्तमान
का चेहरा देख
कर मेरा भूत
इठला कर हंसा
और कहा की
वर्तमान तू मेरी
बेईज्ज़ती कर रहा है
,उम्र में मैं
तुझसे बड़ा हूँ और
मैंने जो
सीख तुझे दी
उसपे तेरे निष्ठा
से अमल ना
करने का ही
ये परिणाम
है। और मै
अभी भी खड़ा
हुआ अपने भूत
को टुकुर-टुकुर
निहार रहा था
,इतना खूबसूरत जो था
वो। आखिर में
उसके तीखे प्रहार
मेरी तरफ भी
आये, उसने मुझसे
कहा इसकी उदासी
में तेरा भी बहुत
बड़ा हाथ है
,तुझे इसे अपने
साथ लेकर चलना
चाहिए था , ये
अभी हल्का सा
कमज़ोर है और
तेरे इसे अकेला
छोड़ने का ही
परिणाम है की
तेरे भविष्य ने
इसे धर दबोचा।
मैं
चुप-चाप सुनता
रहा , मैं जानता
था की वो
सच कह रहा
है ,मैं जानता
था की मैंने
कुछ ऐसा ही उसके
साथ भी किया
है ,नही तो
आज मुझे उस
हसीन के दूर
जाने का पछतावा
ना होता ।
मैंने मन ही मन
प्रण किया की
मैं ये गलती
दुबारा नही करूँगा,
और मेरा वर्तमान
जिसकी सुन्दरता मै
देख नहीं
पा रहा, क्या
पता शायद आगे
जा कर इसके
लिए भी मुझे
पछताना पड़े। मेरी
आखों में आंसू
थे, मैंने
सच को महसूस
किया,अगले ही
क्षण मैंने मेरे
वर्तमान को गले
से लगा लिया
और दिल ही
दिल में
कहा अब तुझे
कभी अकेला नही
होने दूंगा , तू मेरा
सच्चा दोस्त है
और हम मिल
कर लड़ेंगे भविष्य से ।
मेरे भूत के
मुखमंडल पर अजीब
सी भीनी हंसी थी,
उसके विश्वास से
झलक रहा था
वो जिस काम
के लिए
आया है शायद
वो पूरा हो
गया।