कुछ करिए कुछ करिए नस नस मेरी बोले
आज गुस्ताखी कर लेने
दो,
मुझे जी भर
के तुमसे आशिकी
कर लेने दो!
माना रास्ते बहोत हैं
टेढ़े मेढ़े , पर
एक बार तो
इन पर चल
लेने दो!
मै देख रहा
हूँ इन कच्चे
रास्तों पर मुर्दे
हैं पड़े, मुझे
आज इनका अंतिम
संस्कार भी कर
लेने दो!
निमंत्रण है सभी
जिंदादिल नव-जवानों
को अंतिम यात्रा
में शामिल होने
का ,
मुझे भरोसा है फिर
सुबह होगी, बस
एक बार इन
मुर्दों की चिता
को जल लेने
दो!
तुम्हें आभास भी
नही उस सुबह
की रौशनी कितनी
हसीन होगी,
तो क्या हुआ
हम ना रहे,
इस सुबह को
आने वाली कौम
के लिए ही
हो आने दो!
इस नयी सुबह के स्वागत
की तैयारियां हमे करनी होगी, धीरज धरो मुझे कुमकुम, चावल, दही तो ले आने दो!
यह सुबह सफेदपोश कुर्तों
के काले दाग उजागर करेगी, आज ना रोको हमे, कुर्तों के इन दागों को स्वच्छ कर लेने
दो!
आज फिर गुस्ताखी कर
लेने दो !
निखिल श्रीवास्तव "संयम"
निखिल श्रीवास्तव "संयम"
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