Sunday, February 10, 2013

एहसास है

अमावस की रात में इक चाँद की सी रौशनी का एहसास है ,
जेठ की इस बेरुखी में सावन की भीनी सी खुशबु का एहसास है ,
यौवन की मचलती बयार में बचपन की इठलाती फुहार का एहसास है ,
नाउम्मीदियों की तंग गलियों में उम्मीद की आस का एहसास है ,
बेमानी की राह पर इमानियत की बावलियों का एहसास है ,
संसार के बोझ तले दबे कन्धों से इतर मस्ती और जिन्दादिली का एहसास है ,
असहाय की आखों में रुके हुए अश्रुओं में जीवन की लालसा का एहसास है ,
समाज के झुठलाते रिश्तों के बीच, रिश्तों के अजीब से बंधन का एहसास है ,
और तन्हाई में कभी कभी मैं के बीच हम का एहसास है 

                                     निखिल श्रीवास्तव 'संयम'